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Tuesday, October 11, 2011

40 अस्तित्व, अनस्तित्व से जन्म लेता है।

ताओ तेह किंग 40

वापिस हो जाना ताओ की गति / प्रवृत्ति है।
उपजना ताओ का तरीका है।
दसियों हजारों चीजें ऐसे ही अस्तित्व में आती हैं।
और अस्तित्व, अनस्तित्व से जन्म लेता है।

Friday, July 8, 2011

विनम्रता ही उत्कृष्टता का मूल है।

सारी सृष्‍टि‍ की रचना एक सृष्‍टा से हुई। धरती, आकाश और सारी प्रकृति‍ अपने आप में पूर्ण है क्‍योंकि‍ ''उनमें जो वो हैं''  ''उससे इतर कुछ होने की कामना''  का अभाव है।  हम भी सम्‍पूर्ण हो सकते हैं अगर ''हम जो हैं '' उसे ही पर्याप्‍त रूप से समझ लें। इस सम्‍पूर्णता में रहना ही नैति‍कता है, इस सम्‍पूर्णता से भटकना ही अनैति‍कता है, भ्रष्‍टता है। जब इंसान अपने संपूर्णत्‍व को जान लेता है तो ही उसे सारी मानवजाति‍ और सारी सृष्‍टि‍ के प्रत्‍येक जीव अजीव का महत्‍व भी ज्ञात होता है... उनकी सम्‍पूर्णता का भी भान होता है.. यह सहज व्‍यवहार ही वि‍नम्रता है। और वि‍नम्रता कि‍सी भी उत्‍कृष्‍टता का मूल है, आधार है।

ताओ तेह किंग 39
ये चीजों प्राचीन काल में एक ही से जन्मी। आकाश सम्पूर्ण है और साफ है। धरती सम्पूर्ण है और सुस्थिर है। आत्मा सम्पूर्ण और सबल है। घाटी सम्पूर्ण है और भरी पूरी है। दसियों हजारों चीजें सम्पूर्ण और जिन्दा हैं। राजा और देवता सम्पूर्ण हैं, और देश में खरापन है। यह सभी सम्पूर्णता की नैतिकता में हैं। आकाश की पारदर्शिता उसे गिरने से बचाती है। पृथ्वी का ठोसपन उसे खंडखंड होने से बचाता है! आत्मा की सुदृढ़ता उसे इस्तेमाल होने से बचाती है! घाटी की सम्पूर्णता उसे सूखे से बचाती हैं! दसियों हजारों चीजों की बढ़वार उन्हें मुरझाने से बचाती है। राजा का नेतृत्व और देवता देश को पतन में जाने से बचाते हैं।  इसलिए ही विनम्रता ही उत्कृष्टता का मूल है।  नियम ऊंचाईयों का आधार हैं। इनके बिना राजकुमार और देवता अपने आपको अनाथ, विधुर-विधवा, या निरर्थक विचारते हैं। क्याये लोग विनम्रता पर निर्भर नहीं हैं। बहुत ही अधिक सफलता का कोई लाभ नहीं ! धातुओं की तरह मत खड़खड़ाओ मत या पत्थरों की घंटियों की तरह खटपट मत करो।

Wednesday, July 6, 2011

महान व्यक्ति किसी भी चीज के मूल को समझता है, ना कि सतही बातों को।

ताओ तेह किंग 38
एक वाकई में भला आदमी, अपने भलेपन से बेखबर रहता है।
इसलिए तो वो भला है।
एक चालाक, सदैव भला आदमी होने की कोशिश करता है
इसलिए वो भला नहीं होता।

एक वाकई भला आदमी कुछ नहीं करता
और ऐसा कुछ भी नहीं छोड़ता जो अन-किया बचा हो।
एक मूर्ख व्यक्ति हमेशा कुछ ना कुछ करता रहता है
और हमेशा ही उसके पास कुछ ना कुछ करने को होता है।

जब वाकई एक दयालु आदमी कुछ करता है, तो वो कुछ भी अन-किया नहीं छोड़ता।
और जब एक आम आदमी कुछ करता है, तो उसके करने के लिए बहुत कुछ हमेशा बचा रहता है।
जब एक अनुशासनप्रिय कुछ करता है तो कोई प्रतिक्रिया नहीं होती,
वो किसी प्रयास को बल देने के लिए, अपनी आस्तीने नहीं चढ़ाता।

इसलिए जब ताओ खो जाता है, तो भलाई है।
जब भलाई खो जाती है तो, दयालुता है
जब दयालुता खो जाती है, तो केवल न्याय होता है
जब न्याय खो जाता है तो केवल परम्पराएं या रिवाज रह जाते हैं
परम्पराएं आस्था और ईमानदारी के भूसे के समान हैं, जो भ्रमों की शुरूआत है।
यहीं से नादानियों का आरंभ होता है।
भविष्य का ज्ञान केवल ताओ की ही सुकोमल पकड़ में रहता है।

अतःएव वाकई महान व्यक्ति किसी भी चीज के मूल को समझता है, ना कि सतही बातों को।
वह जड़ों को देखता है ना कि फूलों फलों को।
इसलिए केवल इसी को स्वीकारे बाकी सब नकार दें, निरस्त करें।

Tuesday, July 5, 2011

बिना इच्छा किये, इच्छाहीन होना, इसी तरीके से सारी चीजें शांति में रहती हैं।

ताओ तेह किंग 37
ताओ अकर्म में बना रहता है।
तथापि ऐसा कुछ भी नहीं बचा जो नहीं हुआ।
अगर राजा और मसीहा इसका अवलोकन करें
तो दसियों हजारों चीजें कुदरतन विकसित हो जायें
यदि वो फिर भी कुछ करने की इच्छा रखते हैं
तो उन्हें निराकार पदार्थ की सरलता में लौटना होगा।
बिना इच्छा किये, इच्छाहीन होना
इसी तरीके से सारी चीजें शांति में रहती हैं।

Monday, July 4, 2011

उसका किसी तरह दोहन भी नहीं किया जा सकता

ओ तेह किंग 35
वो सभी लोग उसी तक आते हैं
जो एक को ही मानते हैं
उनके लिए वह परमविश्राम, खुशी और शांति है

आते जाते लोग अच्छे संगीत और खाने के लिए रूक सकते हैं
लेकिन ताओ का विवरण
वैसे ही होता है जैसे कुछ ना हो कर होना, बेस्वाद सा होना
वो दिखता नहीं, वो सुनाई नहीं देता
और ये भी कि उसका किसी तरह दोहन भी नहीं किया जा सकता

Saturday, July 2, 2011

वो अपने मक्सद खामोशी में पूरे कर लेता है और कोई दावा नहीं करता।

ताओ तेह किंग 34
महान ताओ हवा की तरह हमारे अगल बगल बहता है, दाईं ओर भी बाईं ओर भीं।
दसियों हजारों चीजें उस पर निर्भर हैं, पर वो किसी पर आधिपत्य नहीं रखता।
वो अपने मक्सद खामोशी में पूरे पा लेता है और कोई दावा नहीं करता।

वो दसियों हजारों चीजों को पुष्ट करता है
तब भी वो उनका खुदा नहीं है
उसका कोई लक्ष्य नहीं है, वह सूक्ष्मतम है।

उसमें दसियों हजारों चीजें वापिस समा जाती हैं
तब भी वो उनका खुदा नहीं है
यह ही तो अत्यधिक महानता है

वो अपनी महानता कभी भी प्रदर्शित नहीं करता
इसलिए भी, वो वाकई महान है।

Friday, July 1, 2011

दूसरों को जानना अक्लमंदी है, खुद को जानना बुद्धत्व।

ताओ तेह किंग 33

दूसरों को जानना अक्लमंदी है।
खुद को जानना बुद्धत्व है।
दूसरों पर प्रभुत्व पाने के लिए ताकत की जरूरत पड़ती है
खुद पर प्रभुत्व पाने के लिए दृढ़ता और मजबूती की जरूरत होती है।

वो जो यह जानता है कि उसके पास काफी है, वो अमीर है।
धैर्य इच्छाशक्ति का परिचायक है।
वो जो वहां रहता है, जहां वो है, वही सदा रहता है।
वो मरता है, पर नष्ट नहीं होता, सदैव रहता है।

Tuesday, June 28, 2011

यह जानना कि कब रूका जाये, समस्याओं से बचाता है।

ताओ तेह किंग 32

ताओ हमेशा के लिए अपरिभाषित है
वह सूक्ष्मतम है, वह ऐसी अवस्था में है, जब बना ही नहीं है, अनादि है।
उसे ग्रहण नहीं किया जा सकता।
अगर कोई एक असली राजा और कोई मसीहा उसे अमल में लाते हैं
तो हजारों चीजें एकसाथ आ जाती हैं
और आनन्द की वर्षा होती है
किसी भी इंसान को किन्हीं कायदे कानूनों का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती
सारी चीजें स्वतः समरस (हारमोनी में)-सामंजस्यपूर्ण हो चलने लगती हैं।

जब अखण्ड को, सम्पूर्ण को बांटा जाता है, तो इन टुकड़ों को नाम की जरूरत पड़ती है।
हालांकि अभी ही काफी नाम हैं।
किसी को तो समझना जानना चाहिए कि कब रूका जाये।
यह जानना कि कब रूका जाये, समस्याओं से बचाता है।
ताओ दुनियां में वैसे ही है जैसे एक नदी अपने घर या समन्दर की ओर जा रही है।

Monday, June 27, 2011

36 जो भी कमजोर होता है सबसे पहले उसका मजबूत होना अनिवार्य है

ताओ तेह किंग 36
जो भी सिकुड़ता है
सबसे पहले उसका फैलना अनिवार्य है
जो भी कमजोर होता है
सबसे पहले उसका मजबूत होना अनिवार्य है
जो भी नीचे गिराया जाना है
सबसे पहले उसका उठना अनिवार्य है
लेने से पहले
कुछ दिया जाना भी अनिवार्यता है।

इसे चीजों की प्रकृति का अवलोकन करना कहा जाता है,
मृदु और दुर्बल, कड़े और मजबूत होने से उबरने के बाद होते हैं।

जैसे मछली गहरे पानी को नहीं छोड़ती,
ऐसे ही किसी देश के शस्त्रास्त्र का प्रदर्शन नहीं किया जाना चाहिए।

Saturday, June 25, 2011

31 किसी विजय का एक दाह संस्कार की तरह अवलोकन किया जाना चाहिए।

ताओ तेह किंग 31
अच्छे शस्त्र भय के यंत्र होते हैं, सभी जीव जंतु इनसे नफरत करते हैं।
इसलिए ताओ का अनुयायी इनका इस्तेमाल नहीं करता।
भला आदमी उल्टे वाम पक्ष को प्राथमिकता देता है
युद्धेच्छु दक्षिण हाथ को।

शस्त्रास्त्र भय के साधन हैं, यह भले आदमी के औजार नहीं।
वह उसे तभी इस्तेमाल करता है जब कोई विकल्प नहीं होता।
शांति और मौन उसके ह्दय को सदैव प्रिय होते हैं
और विजय किसी भी आनंद का कारण नहीं होती।
यदि आप विजय का जश्न मनाते हैं तो आप आपको हत्याओं में भी आनन्द मनाएंगे
और यदि आप हत्याओं में आनंद मना पाते हैं तो कभी भी अपने आप में सम्पूर्णता नहीं पा सकेंगे।

खुशियों के मौकों पर
वाम को वरीयता दी जाती है
और दुख के मौके पर
दक्षिण पक्ष को
सेना में आम सैनिक वाम पक्ष की ओर खड़ा होता है
और सेनाध्यक्ष दक्षिण पक्ष में
इसका मतलब है युद्ध एक दाहसंस्कार की तरह है
जब कई लोग मारे जाते हैं
जिनके लिए गहरे दुख भरे ह्दय से विलाप किया जाना चाहिए
यही वजह है कि किसी विजय का एक दाह संस्कार की तरह अवलोकन किया जाना चाहिए।

Monday, June 6, 2011

29 साधु अति, ज्यादती से बचता है सम्तोष में रहता है।

ताओ तेह किंग 29 

क्या आप सोचते हैं कि दुनियां आपके हवाले कर दी जाये तो आप उसे सुधार देंगे?
मैं नहीं समझ सकता कि ऐसा किया जा सकता है।

ब्रह्माण्ड परमपावन है।
यदि आप इसे बदलते हैं तो आप इसका सत्यानाश कर देंगे।
यदि आप इस पर आधिपत्य करना चाहेंगे तो इसे खो देंगे।

तो चीजें कभी हमसे आगे होती हैं कभी पीछे।
कभी सांस लेना बहुत ही मुश्किल होता है, कभी आसान।
कभी सबलता होती है, कभी निर्बलता।
कभी कुछ ऊपर होता है, कभी नीचे।
इसलिए साधु अति, ज्यादती से बचता है सम्तोष में रहता है।

28 सदैव सच पर अडिग रहो ताकि अनन्त में लौट सको।

 ताओ तेह किंग 28
एक मर्द की ताकत जानो
पर एक औरत की देखभाल का ध्यान रखो।
ब्रहमांण्ड की एक धारा हो रहो
ब्रहमाण्ड की एक धारा होने के नाते
सदैव सच पर अडिग रहो
ताकि फिर से
एक छोटे बच्चे से हो सको।

सफेद को जानो
कालिमा को संभालो
दुनियां के सामने उदाहरण बनो
और दुनियां का उदाहरण होने के नाते
सदैव सच पर अडिग रहो
ताकि अनन्त में लौट सको।

आदर को जानो
तो भी विनम्रता को संभालो
ब्रह्माण्ड की घाटी हो रहो
ब्रह्माण्ड की घाटी होने के नाते
सदैव सच्चे और साधनसंपन्न रहो
ताकि अपनी अनघड़ अवस्था में लौट सको।

जब कोई लकड़ी का लड्ठा तराशा जाता है
तो वह अनुपयोगी हो जाता है
जब कोई साधु इसका इस्तेमाल करता है, वह नियंता हो सकता है,
क्‍योंकि‍ वह न्‍यूनतम काटता छांटता है। 

Saturday, June 4, 2011

46 इच्छा से बड़ा कोई पाप नहीं है

ताओ तेह किंग 46
जब ब्रह्मांड में ताओ मौजूद होता है तो
घोड़े खाद ढोते/घसीटते हैं
जब ताओ ब्रह्मांड में मौजूद नहीं होता
शहर के बाहर युद्धोन्मादी घोड़े जन्म लेते हैं

इच्छा से बड़ा कोई पाप नहीं है
असंतोष से बड़ा अभिशाप नहीं है
अपने लिए कुछ भी मांगने से बड़ा दुर्भाग्य नहीं है
इसलिए वो जो कि जानता है कि काफी ही काफी है, उसके पास हमेशा काफी रहता है।

Friday, June 3, 2011

27 उससे अभी तक कोई भी जुदा नहीं हो पाया है।

ताओ तेह किंग 27

एक अच्छी चालढाल वाला आदमी अपने पैरों के निशान नहीं छोड़ता।
एक अच्छे वक्ता की जुबान नहीं फिसलती।
एक अच्छे अनुमान लगाने वाले को गिनने की जरूरत नहीं पड़ती।
एक मजबूत दरवाजे को ताले की आवश्यकता नहीं होती -
उसे अभी तक कोई नहीं खोल पाया।
अच्छे बंधन के लिए, गांठें लगाने की जरूरत नहीं होती-
क्योंकि अभी तक कोई भी उससे खुल नहीं पाया है।


इसलिए साधु सभी इंसानों का ध्यान रखता है,
किसी एक को भी नहीं छोड़ता।
वह सभी चीजों का ध्यान रखता है,
और उससे कुछ भी नहीं छूटता।
इसे ही प्रकाश का अनुसरण करना कहते हैं।

एक अच्छा आदमी कौन है?
एक बुरे आदमी का शिक्षक।
एक बुरा आदमी कौन है
जिसके आधिपत्य में भला आदमी है।
यदि शिक्षकों का आदर नहीं होगा
और शिष्यों का ध्यान नहीं रखा जायेगा
तो भ्रम पैदा होगा
चाहे कोई कितना ही बुद्धिमान हो।
यही रहस्य का मूलबिन्दु है।

26 एक स्थिर ही सारे चलायमान का आधार है


जो भारी है वह हल्के का मूल है
एक स्थिर ही सारे चलायमान का आधार है

इसलिए साधु सारा दिन सफर में रहते हैं
और अपनी गठरी पर नजर रखता है
हालांकि यहां कई सुन्दर चीजें देखने को हैं
वह सबसे (अ-जुड़ा) अममत्व में,
ओर शांत रहता है

क्यों दसियों हजारों रथों का स्वामी
जनता में लड़खड़ाता हुआ चलता है
हल्का होना, अपनी जड़ों से उखड़ना है
अशांत होना, अपने पर ही नियंत्रण खोना है

Thursday, June 2, 2011

अच्छे वर्षों को युद्ध के लिए ना बितायें

ताओ तेह किंग 30
अगर आप ताओ के तरीके से किसी शासक को सुझाव दें
तो यह सलाह दें ब्रह्माण्ड को जीतने हेतु ताकत का इस्तेमाल ना करें।
यह केवल प्रतिरोध का कारण होगा।
जहां से भी सैनिकों के बूट गुजरते हैं, कंटीली झाडि़यां उग आती हैं।

अच्छे वर्षों को युद्ध के लिए ना बितायें
बस वही करें जिसकी आवश्यकता है
शक्ति का अन्यथा लाभ ना उठायें।

उपलब्धियां हासिल करें
पर उनकी महिमा ना गाने लगें।
उपलब्धियां हासिल करें
लेकिन शेखी ना बघारें
उपलब्धियां हासिल करें
लेकिन अभिमान ना करें
उपलब्धियां हासिल करें
क्योंकि यह प्राकृतिक तरीका है
उपलब्धियां हासिल करें
लेकिन हिंसा के द्वारा नहीं।

बलप्रयोग के पीछे पीछे ही शक्ति का पतन चला आता है,
यह ताओ का तरीका नहीं है
जो भी ताओ के विपरीत जाता है
जल्द ही परिणिति को पहुंचता है।

25 सदैव अभी यहीं, और गतिमान


कुछ रहस्यात्मक तरीकों से गढ़ा गया है
स्वर्ग और पृथ्वी से पहले जन्मा है
चुप्पी और शून्य में
अपने आप में अकेला खड़ा है, बिना बदले अपरिवर्तनीय
सदैव अभी यहीं, और गतिमान
जो संसार की करोड़ों चीजों की जननी है
मैं उसका नाम नहीं जानता
उसे ताओ कहता हूं
और बेहतर शब्द की कमी के कारण
महान !

वो महान, बहता है
वो बहुत दूर बहता है
चला ही जाता है और
लौट आता है

इसलिए ताओ महान है
स्वर्ग महान है
धरती महान है
राजा महान है
यह ब्रहमाण्ड की चार महान शक्तियां हैं
और राजा इनमें से ही एक है

इंसान धरती का अनुसरण करता है
धरती स्वर्ग का अनुसरण करती है
स्वर्ग ताओ का अनुसरण करता है
ताओ अपनी ही प्रकृति‍ का अनुसरण करता है

Tuesday, October 27, 2009

24 जो भागदौड़ में ही लगा हो, वह प्रगति नहीं कर सकता।

जो पंजों के बल खड़ा हो, वह स्थिर या दृढ़ नहीं होता।
जो भागदौड़ में ही लगा हो, वह प्रगति नहीं कर सकता।
जो दिखावा करता है, वह प्रबुद्ध नहीं है।
जो खुद को ही सही साबित करने में लगा रहता है वह सम्माननीय नहीं होता।
जो दावा करता है, निश्चित ही उसने कुछ भी अर्जित नहीं किया है।
जो डींगे मारता है, उसने निश्चित ही सत्य नहीं भोगा।

परमात्मा का सच्चा अनुसरणकर्ता कहता है अतिरिक्त भोजन और वस्त्र अनावश्यक बोझ है, जो खुशी नहीं देता, इसलिए वो इनके परे रहता है।

Monday, October 26, 2009

23 देर रात गये आया तूफान बहुत देर तक नहीं ठहरता।

मित भाषण श्रेयस्कर है।
प्रकृति भी मितभाषी होती है।


देर रात गये आया तूफान बहुत देर तक नहीं ठहरता।
लगातार कई दिनों तक बारिश हो, ऐसा भी कम ही होता है।
यहाँ तक कि प्रकृति भी एक ही रूप में बहुत देर तक नहीं रहती।
जमीन और आसमान भी एक जैसे नहीं रहते।
तो आदमी के अस्तित्व की क्या कहें?

जो परमात्मा का अनुसरण करता है परमात्मा से ही ऐक्य प्राप्त कर लेता है।
जो पुण्य करता है, पुण्यों को प्राप्त होता है।
जो मार्ग से भटक जाता है, वह नष्ट हो जाता है।

जो परमात्मा का साह्चर्य करता है परमात्मा उसका स्वागत करता है।
जो पुण्यों के साथ साहचर्य करते हैं वह पुण्य भोगते हैं।
जो मार्ग भटकता है वह अपनी इच्छा से भटकने का आनंद भोगता है।


जो किसी पर विश्वास नहीं करता, लोग भी उस पर विश्वास नहीं करते।
जो किसी पर विश्वास नहीं करता, उसका विश्वास कैसे किया जा सकता है?

Friday, October 23, 2009

22 मृतप्राय या न होने जैसा हो जाने में ही परम संरक्षण है।

22

बीज में ही वृक्ष छुपा रहता है।
जो पैदा होता है, नष्ट होता है वो फिर पैदा होता है अर्थात् मृत्यु में संरक्षण है।

जो मुड़ा हुआ है, वही सीधा हो सकता है।
जो खाली है, वही भर सकता है।
जो पुराना होता और घिसता है, वही नया हो सकता है।
जितने कम की उम्मीद रखेंगे, उतना ही अधिक मिलेगा।
जितना अधिक पाने की कोशिश करंेगे उतना ही भ्रम में पड़ेंगे।

इसलिए भला आदमी एक ही को अपनाता है और दूजों के लिए उदाहरण बनता है।
वह प्रदर्शन नहीं करता, सामने नहीं आता, इसलिए चैगुना प्रसिद्ध होता है।
अपने आपको सिद्ध करने की कोशिश नहीं करता, इसलिए सभी उसे उत्कृष्ट कहते हैं।
अभिमान नहीं करता, इसलिए सभी जगह मान्य होता है।
डींगंे नहीं मारता, इसलिए उसे नीचा नहीं देखना पड़ता।
वह किसी से लड़ता झगड़ता नहीं, इसलिए उससे भी कोई नहीं लड़ता-झगड़ता।

इसलिए प्राचीन लोग कहते थे:
मृतप्राय या न होने जैसा हो जाने में ही परम संरक्षण है।
तब वह पूर्ण हो जाता है और सब कुछ उसी में समाहित रहता है।