Monday, September 21, 2009

एक जिज्ञासु मन

हदय की सच्चाईयों के लिए हमारे भीतर ही एक जिज्ञासु मन है। इसे खोजें, और जीवन ने जो समस्याएं दी हैं उनके निराकरण के लिए इसे प्रयास करने दें। इसे चीजों और घटनाओं के निचोड़ तक पहुंचने की कोशिश करने दें, यहाँ तक कि इसे स्वयं के भीतर तक पैठने दें। यदि व्यक्ति दृढ़तापूर्वक कारणों के बारे में सोचता-समझता है, तो चाहे वह समस्याओं के निराकरण के लिए किसी भी मार्ग का अनुसरण करने वाला हो, वह अनिवार्यतः अन्ततः स्वयं तक ही पहुँच जायेगा, और उसे समस्या का हल वहाँ से शुरू करना होगा - जहाँ ये प्रश्न उठते हैं कि वह स्वयं अपने में क्या है? उसके चारों ओर जो जगत है उसमें उसका क्या स्थान है?
- जी आई गुरजियफ
मूल स्रोत:  www.gurdjieff.org 

‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 9

  • कगार तक भरने के पहले ही ठहर जाना उत्तम है।
  • अगर तलवार चाकू को अत्यधिक धारदार बनाएंगे तो वह जल्दी ही कुंद भी हो जाएंगे या सबल नहीं रहेंगे।
  • धन और हीरे पन्नों का कोई संग्रह संचय करे तो वह हमेशा के लिए कभी भी उन्हें सुरक्षित नहीं रख पाएगा।
  • धन सम्पत्ति और पदवियों-मान-सम्मान पर दावा करने वालों का विपत्तियाँ अनुसरण करती हैं।
  • काम खत्म हो जाये तो निवृत्त हो जाओ।
यही स्वर्गीय तरीके हैं।


मूल सामग्री : http://www.iging.com/laotse/LaotseE.htm#14

Sunday, September 20, 2009

‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 8

  • महान भले लोग पानी की तरह होते हैं।
पानी करोड़ों चीजों को जिन्दगी देता है पर वो इसके लिए कोशिश नहीं करता।
वह उन जगहों पर भी बह जाता है जो मनुष्य के लिए अगम्य हैं, इसी तरह परमात्मा है।
  • घर धरती से लगा हुआ , धरती पर ही बनायें।
  • ध्यान में, मन की गहराईयों में उतरें।
  • लोगों से व्यवहार में मृदु और करूणायुक्त बनें।
  • बोलने में सच्चे रहें।
  • शासन में नाममात्र हो रहें।
  • दैनिक जीवन में सक्षम और योग्य रहें।
  • कर्म में, समय और मौसम का ध्यान रखें।
  • लड़ें-झगड़ें नहीं, आरोपी न बनें।
मूल सामग्री : http://www.iging.com/laotse/LaotseE.htm#14

Saturday, September 19, 2009

‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 7

  • स्वर्ग और धरती सदा रहते हैं...स्वर्ग और धरती हमेशा क्यों रहते हैं?
       क्योंकि वह अजन्मे हैं, पैदा ही नहीं होते, इसलिए सदा जीवित हैं।
  • साधुजन पीछे ही रहते हैं, इसलिए हमेशा आगे रहते हैं।
  • वह सबसे असम्पकृत, अलग-थलग रहते हैं इसलिए सबके साथ होते हैं।
  • स्वार्थरहित कर्मों के कारण वह सम्पूर्णत्व को प्राप्त रहते हैं।
मूल सामग्री : http://www.iging.com/laotse/LaotseE.htm#14

Friday, September 18, 2009

‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 4 एवं 5

4

  • परमात्मा खोखली बांसुरी की तरह होता है, उसके खोखलेपन से ही सात सुर निकलते हैं। 
  • वह अगाध-अथाह ही अनन्त चीजों का स्रोत है। 
  • वह धारदार को कुंद बनाता है, गांठ का खोल देता है, चौंधियाहट को सौम्य बनाता है और धूल में ही समाया रहता है।
  • वह अनन्त गहरा और गुप्त है पर सदा ही मौजूद रहता है।
  • मुझे नहीं पता वह कहाँ से आया है, पर वह ईश्वरों का भी ईश्वर है।

5
  • धरती और स्वर्ग निष्पक्ष हैं।
  • वह हजारों चीजों को घास-फूस से बने खिलौने के कुत्ते की तरह देखते हैं।
  • इसी तरह भला आदमी निष्पक्ष होता है।
  • स्वर्ग और धरती के बीच का स्थान धौंकनी की तरह होता है। आकार बदलता है पर उसका रूप नहीं। उसे जितना चलाओ उतना ही पैदावार देती है।
  • अधिक शब्द गिनने योग्य नहीं होते।
  • केन्द्र को दृढ़तापूर्वक पकड़े रहो।
मूल सामग्री : http://www.iging.com/laotse/LaotseE.htm#14

Thursday, September 17, 2009

‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 3

  • जो हमें ईश्वर प्रदत्त या सौभाग्यवश मिल गया है उस पर अभिमान न करके, दूसरों के सामने उसकी प्रशंसा, बखान या बढ़ाई न करके, उसे महत्वपूर्ण न मान कर हम दूसरों की ईष्र्या से बचे रह सकते हैं, इस तरह हम झगड़ों से भी बचे रह सकते हैं।
  • यदि हम संग्रहवृत्ति के हैं तो निश्चित ही हमें चिंता भी होगी। जिनके पास खजाना होता है उन्हें ही चोरों की चिंता होती है।
  • संग्रहवृत्ति को खत्म कर हम चैर्य कर्म (चोरी करने के काम, चोरी करन की आदत) को रोक सकते, और कुछ चोरी के डर या चोरी हो जाने से भी भय से भी मुक्त रह सकते हैं।
  • वस्तुओं को चाह की भावना से न देखकर हम मन के भ्रमों से बचे रह सकते हैं। लालसा, लोभ, आशाएं, उम्मीदें पालने से भी मनुष्य परेशान रहता है। लालसा, लोभ, आशाएं, उम्मीदें निश्चित ही अनावश्यक चीजें हैं। जो सहजतापूर्वक मिल जाए उसमें संतोष, शांति का कारक है।
  • भला आदमी मन के भार को हल्का कर, पेट भर भरने की छोटी सी चिंता, इच्छाओं को न्यूनतम कर और अपने संकल्पों को दृढ़ करके - स्वयं के द्वारा शासित रहता है।
  • यदि आदमी ज्ञानशून्य और इच्छाशून्य हो जाए तो तुच्छ-चालाक और कांईंया लोग किसी भी तरह के हस्तक्षेप की कोशिश भी न कर सकेंगे।
  • यदि आदमी ने कुछ भी नहीं किया गया है, तो सब कुछ ठीक ही होगा।

Thursday, September 10, 2009


‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 2




सभी स्वर्ग को सुन्दर कहते हैं केवल इसलिए नरक और कुरूपता भी जन्म ले लेते हैं।

सभी अच्छे को अच्छे के रूप में जानते हैं क्योंकि वहीं बुराई भी है।

इसलिए होना और नहीं होना एक साथ प्रकट होते हैं।

कठिन और सरल एक दूसरे के पूरक हैं।
बड़ा और छोटा एक दूसरे से हैं।
ऊँचा और नीचा एक दूसरे से ऊपर नीचे हैं।
सुर और शोर एक दूसरे को संतुलित करते हैं।
अगला और पिछला एक दूसरे का अनुगमन करता है।

इसलिए संत ‘‘कुछ न करना’’ करते हैं। मौन रहना सिखाते हैं।

क्या ऐसा नहीं होता कि हजारों चीजें बिना प्रकटाये पैदा होती हैं
और बिना रोके या समाप्त किये खत्म हो जाती या रुक जाती हैं?

तो काम करो, पर उसका श्रेय न लो।
काम खत्म हुआ तो खत्म हुआ, फिर उसे याद क्यों रखना?

जो ऐसा होता है, वह हमेशा रहता है।