- पहिये की परिधि पर फैली तानें, धुरी पर ही टिकी होती हैं
धुरी का खोखलापन ही सारा भार वहन करने में सक्षम होता है - मिट्टी से जब मूर्तियां बनाई जाती हैं तो उनमें उभारों का आधार उनके पीछे का खोखलापन ही होता है।
- मिट्टी के घड़े का खोखलापन ही उसे पानी या अन्य चीजें रखने या सहेजने लायक या उपयोगी बनाता है।
- यदि मकान में खिड़कियां और दरवाजें न हों तो मकान और कब्र में क्या अंतर रहे?
- शून्य और निर्वात चीजों को उपयोगी बनाते हैं।
- जो दिख रहा है ऐसा लगता है कि उससे लाभ मिल रहा है, पर उपयोगी और महत्वपूर्ण वो है जो नहीं होता या नहीं दिखता।
Friday, October 2, 2009
‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 11
Tuesday, September 22, 2009
क्या यहां आप अपने क्षुद्र अहंकार को जीने के लिए ही हैं ?
तीन तरह के बल हैं शरीर, मन और अहसास। जब तक ये इकट्ठे, बराबर, एकसमान समस्वरता से विकसित नहीं होते, ये उच्च बलों से एक स्थिर और सतत सम्पर्क में नहीं बना सकते। तो हमारे काम (‘‘वर्क’’) में सबकुछ उन उच्च बल से सम्पर्क की तैयारी (की जाती) है। यही हमारे काम का लक्ष्य है। उच्च ऊर्जांएँ चाहती तो हैं पर वह देह के तल पर तब तक नहीं आ सकती जब तक कोई काम (‘‘वर्क’’) न करे। काम करने से ही आप अपने उद्देश्य को पूरा कर पाएंगे और ब्रह्मांण्ड के जीवन में शामिल हो पाएंगे और यही है वह जिससे आप अपने जीवन को अर्थ और महत्व दे सकते हैं। अन्यथा आप केवल अपने क्षुद्र अहंकार को जीने के लिए ही हैं और आपके जीवन का कोई अर्थ नहीं है।
- जैने द साजेम्न
मूल स्रोत:
- जैने द साजेम्न
मूल स्रोत:
Monday, September 21, 2009
एक जिज्ञासु मन
हदय की सच्चाईयों के लिए हमारे भीतर ही एक जिज्ञासु मन है। इसे खोजें, और जीवन ने जो समस्याएं दी हैं उनके निराकरण के लिए इसे प्रयास करने दें। इसे चीजों और घटनाओं के निचोड़ तक पहुंचने की कोशिश करने दें, यहाँ तक कि इसे स्वयं के भीतर तक पैठने दें। यदि व्यक्ति दृढ़तापूर्वक कारणों के बारे में सोचता-समझता है, तो चाहे वह समस्याओं के निराकरण के लिए किसी भी मार्ग का अनुसरण करने वाला हो, वह अनिवार्यतः अन्ततः स्वयं तक ही पहुँच जायेगा, और उसे समस्या का हल वहाँ से शुरू करना होगा - जहाँ ये प्रश्न उठते हैं कि वह स्वयं अपने में क्या है? उसके चारों ओर जो जगत है उसमें उसका क्या स्थान है?
- जी आई गुरजियफ
मूल स्रोत: www.gurdjieff.org
- जी आई गुरजियफ
मूल स्रोत: www.gurdjieff.org
‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 9
- कगार तक भरने के पहले ही ठहर जाना उत्तम है।
- अगर तलवार चाकू को अत्यधिक धारदार बनाएंगे तो वह जल्दी ही कुंद भी हो जाएंगे या सबल नहीं रहेंगे।
- धन और हीरे पन्नों का कोई संग्रह संचय करे तो वह हमेशा के लिए कभी भी उन्हें सुरक्षित नहीं रख पाएगा।
- धन सम्पत्ति और पदवियों-मान-सम्मान पर दावा करने वालों का विपत्तियाँ अनुसरण करती हैं।
- काम खत्म हो जाये तो निवृत्त हो जाओ।
मूल सामग्री : http://www.iging.com/laotse/LaotseE.htm#14
Sunday, September 20, 2009
‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 8
- महान भले लोग पानी की तरह होते हैं।
वह उन जगहों पर भी बह जाता है जो मनुष्य के लिए अगम्य हैं, इसी तरह परमात्मा है।
- घर धरती से लगा हुआ , धरती पर ही बनायें।
- ध्यान में, मन की गहराईयों में उतरें।
- लोगों से व्यवहार में मृदु और करूणायुक्त बनें।
- बोलने में सच्चे रहें।
- शासन में नाममात्र हो रहें।
- दैनिक जीवन में सक्षम और योग्य रहें।
- कर्म में, समय और मौसम का ध्यान रखें।
- लड़ें-झगड़ें नहीं, आरोपी न बनें।
Saturday, September 19, 2009
‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 7
- स्वर्ग और धरती सदा रहते हैं...स्वर्ग और धरती हमेशा क्यों रहते हैं?
- साधुजन पीछे ही रहते हैं, इसलिए हमेशा आगे रहते हैं।
- वह सबसे असम्पकृत, अलग-थलग रहते हैं इसलिए सबके साथ होते हैं।
- स्वार्थरहित कर्मों के कारण वह सम्पूर्णत्व को प्राप्त रहते हैं।
Friday, September 18, 2009
‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 4 एवं 5
4
5
- परमात्मा खोखली बांसुरी की तरह होता है, उसके खोखलेपन से ही सात सुर निकलते हैं।
- वह अगाध-अथाह ही अनन्त चीजों का स्रोत है।
- वह धारदार को कुंद बनाता है, गांठ का खोल देता है, चौंधियाहट को सौम्य बनाता है और धूल में ही समाया रहता है।
- वह अनन्त गहरा और गुप्त है पर सदा ही मौजूद रहता है।
- मुझे नहीं पता वह कहाँ से आया है, पर वह ईश्वरों का भी ईश्वर है।
5
- धरती और स्वर्ग निष्पक्ष हैं।
- वह हजारों चीजों को घास-फूस से बने खिलौने के कुत्ते की तरह देखते हैं।
- इसी तरह भला आदमी निष्पक्ष होता है।
- स्वर्ग और धरती के बीच का स्थान धौंकनी की तरह होता है। आकार बदलता है पर उसका रूप नहीं। उसे जितना चलाओ उतना ही पैदावार देती है।
- अधिक शब्द गिनने योग्य नहीं होते।
- केन्द्र को दृढ़तापूर्वक पकड़े रहो।
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