Wednesday, July 6, 2011

महान व्यक्ति किसी भी चीज के मूल को समझता है, ना कि सतही बातों को।

ताओ तेह किंग 38
एक वाकई में भला आदमी, अपने भलेपन से बेखबर रहता है।
इसलिए तो वो भला है।
एक चालाक, सदैव भला आदमी होने की कोशिश करता है
इसलिए वो भला नहीं होता।

एक वाकई भला आदमी कुछ नहीं करता
और ऐसा कुछ भी नहीं छोड़ता जो अन-किया बचा हो।
एक मूर्ख व्यक्ति हमेशा कुछ ना कुछ करता रहता है
और हमेशा ही उसके पास कुछ ना कुछ करने को होता है।

जब वाकई एक दयालु आदमी कुछ करता है, तो वो कुछ भी अन-किया नहीं छोड़ता।
और जब एक आम आदमी कुछ करता है, तो उसके करने के लिए बहुत कुछ हमेशा बचा रहता है।
जब एक अनुशासनप्रिय कुछ करता है तो कोई प्रतिक्रिया नहीं होती,
वो किसी प्रयास को बल देने के लिए, अपनी आस्तीने नहीं चढ़ाता।

इसलिए जब ताओ खो जाता है, तो भलाई है।
जब भलाई खो जाती है तो, दयालुता है
जब दयालुता खो जाती है, तो केवल न्याय होता है
जब न्याय खो जाता है तो केवल परम्पराएं या रिवाज रह जाते हैं
परम्पराएं आस्था और ईमानदारी के भूसे के समान हैं, जो भ्रमों की शुरूआत है।
यहीं से नादानियों का आरंभ होता है।
भविष्य का ज्ञान केवल ताओ की ही सुकोमल पकड़ में रहता है।

अतःएव वाकई महान व्यक्ति किसी भी चीज के मूल को समझता है, ना कि सतही बातों को।
वह जड़ों को देखता है ना कि फूलों फलों को।
इसलिए केवल इसी को स्वीकारे बाकी सब नकार दें, निरस्त करें।

Tuesday, July 5, 2011

बिना इच्छा किये, इच्छाहीन होना, इसी तरीके से सारी चीजें शांति में रहती हैं।

ताओ तेह किंग 37
ताओ अकर्म में बना रहता है।
तथापि ऐसा कुछ भी नहीं बचा जो नहीं हुआ।
अगर राजा और मसीहा इसका अवलोकन करें
तो दसियों हजारों चीजें कुदरतन विकसित हो जायें
यदि वो फिर भी कुछ करने की इच्छा रखते हैं
तो उन्हें निराकार पदार्थ की सरलता में लौटना होगा।
बिना इच्छा किये, इच्छाहीन होना
इसी तरीके से सारी चीजें शांति में रहती हैं।

Monday, July 4, 2011

उसका किसी तरह दोहन भी नहीं किया जा सकता

ओ तेह किंग 35
वो सभी लोग उसी तक आते हैं
जो एक को ही मानते हैं
उनके लिए वह परमविश्राम, खुशी और शांति है

आते जाते लोग अच्छे संगीत और खाने के लिए रूक सकते हैं
लेकिन ताओ का विवरण
वैसे ही होता है जैसे कुछ ना हो कर होना, बेस्वाद सा होना
वो दिखता नहीं, वो सुनाई नहीं देता
और ये भी कि उसका किसी तरह दोहन भी नहीं किया जा सकता

Saturday, July 2, 2011

वो अपने मक्सद खामोशी में पूरे कर लेता है और कोई दावा नहीं करता।

ताओ तेह किंग 34
महान ताओ हवा की तरह हमारे अगल बगल बहता है, दाईं ओर भी बाईं ओर भीं।
दसियों हजारों चीजें उस पर निर्भर हैं, पर वो किसी पर आधिपत्य नहीं रखता।
वो अपने मक्सद खामोशी में पूरे पा लेता है और कोई दावा नहीं करता।

वो दसियों हजारों चीजों को पुष्ट करता है
तब भी वो उनका खुदा नहीं है
उसका कोई लक्ष्य नहीं है, वह सूक्ष्मतम है।

उसमें दसियों हजारों चीजें वापिस समा जाती हैं
तब भी वो उनका खुदा नहीं है
यह ही तो अत्यधिक महानता है

वो अपनी महानता कभी भी प्रदर्शित नहीं करता
इसलिए भी, वो वाकई महान है।

Friday, July 1, 2011

दूसरों को जानना अक्लमंदी है, खुद को जानना बुद्धत्व।

ताओ तेह किंग 33

दूसरों को जानना अक्लमंदी है।
खुद को जानना बुद्धत्व है।
दूसरों पर प्रभुत्व पाने के लिए ताकत की जरूरत पड़ती है
खुद पर प्रभुत्व पाने के लिए दृढ़ता और मजबूती की जरूरत होती है।

वो जो यह जानता है कि उसके पास काफी है, वो अमीर है।
धैर्य इच्छाशक्ति का परिचायक है।
वो जो वहां रहता है, जहां वो है, वही सदा रहता है।
वो मरता है, पर नष्ट नहीं होता, सदैव रहता है।

Tuesday, June 28, 2011

यह जानना कि कब रूका जाये, समस्याओं से बचाता है।

ताओ तेह किंग 32

ताओ हमेशा के लिए अपरिभाषित है
वह सूक्ष्मतम है, वह ऐसी अवस्था में है, जब बना ही नहीं है, अनादि है।
उसे ग्रहण नहीं किया जा सकता।
अगर कोई एक असली राजा और कोई मसीहा उसे अमल में लाते हैं
तो हजारों चीजें एकसाथ आ जाती हैं
और आनन्द की वर्षा होती है
किसी भी इंसान को किन्हीं कायदे कानूनों का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती
सारी चीजें स्वतः समरस (हारमोनी में)-सामंजस्यपूर्ण हो चलने लगती हैं।

जब अखण्ड को, सम्पूर्ण को बांटा जाता है, तो इन टुकड़ों को नाम की जरूरत पड़ती है।
हालांकि अभी ही काफी नाम हैं।
किसी को तो समझना जानना चाहिए कि कब रूका जाये।
यह जानना कि कब रूका जाये, समस्याओं से बचाता है।
ताओ दुनियां में वैसे ही है जैसे एक नदी अपने घर या समन्दर की ओर जा रही है।

Monday, June 27, 2011

36 जो भी कमजोर होता है सबसे पहले उसका मजबूत होना अनिवार्य है

ताओ तेह किंग 36
जो भी सिकुड़ता है
सबसे पहले उसका फैलना अनिवार्य है
जो भी कमजोर होता है
सबसे पहले उसका मजबूत होना अनिवार्य है
जो भी नीचे गिराया जाना है
सबसे पहले उसका उठना अनिवार्य है
लेने से पहले
कुछ दिया जाना भी अनिवार्यता है।

इसे चीजों की प्रकृति का अवलोकन करना कहा जाता है,
मृदु और दुर्बल, कड़े और मजबूत होने से उबरने के बाद होते हैं।

जैसे मछली गहरे पानी को नहीं छोड़ती,
ऐसे ही किसी देश के शस्त्रास्त्र का प्रदर्शन नहीं किया जाना चाहिए।