Saturday, September 5, 2009

ईश्वर क्या है?

ईश्वर क्या है?
‘‘ताओ तेह किंग’’ अध्याय 1

  1. जो कहा जा सकता है वह यथार्थ में या मूलतः ताओ नहीं।
  2. ताओ को यथार्थतः व्यक्त नहीं किया जा सकता।
  3. जिस किसी भी व्यक्ति या वस्तु आदि को जो नाम दिया जाता है वह उसका मूल नाम नहीं होता, संज्ञा मात्र होती है।
  4. उस अनाम ईश्वर से ही स्वर्ग और धरती जैसी चीजें जन्मी।
  5. जिसे नामरूप में ईश्वर या व्यक्त ईश्वर के रूप में जाना जाता है वह ही अन्य हजारों व्यक्त चीजों का जन्मदाता या माता है।
  6. हमेशा कोई वासनाशून्य ही, उस अव्यक्त रहस्य को देख पाता है।
  7. हमेशा कोई इच्छा रखने वाला, उसे व्यक्त रूप में देखता है।
  8. यह दोनों नामों अन्तर (व्यक्त और अव्यक्त) मात्र से एक ही स्रोत प्रकट होते हैं। वो मूल स्रोत गहन है।
  9. वो गहन से भी गहनतम, परम गहन है।
  10. वो सभी रहस्यों का द्वार है।
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